उद्देश्य

राष्ट्रीय एकता

सब साधन से रहे समुन्नत, भगवन देश हमारा । देव प्रज्ञा से पूरित विप्र समाज ने अपने दिगंत भेदी तप व चिंतन से हमारे दिव्य राष्ट्र का मनोरम शृंगार करके इसे विश्वगुरु के गौरवमय पद पर प्रतिष्ठित किया है, समय की आवश्यकताओं का अवलोकन कर सदैव देश को युगानुकूल मार्ग दिखाया है। राष्ट्र कल्याण की भावना के साथ अनन्ताकाश की भांति विराट दृष्टिकोण लिये विप्र फाउण्डेशन प्रयत्नरत है । समृद्ध एवं सशक्त भारत के निर्माण हेतु हम कृत संकल्पित हैं । वर्तमान में विप्र फाउण्डेशन द्वारा राष्ट्रीय एकता को समर्पित कुछ प्रमुख कार्यक्रम:-

गो संवर्द्धन

गोपालन कुटुम्ब, समाज तथा राष्ट्र के लिए मंगलदायक होता है। विफा द्वारा देशभर में गोसंवर्द्धन हेतु जागरूकता लाने एवं यथासम्भव प्रति परिवार द्वारा एक गाय का भरण पोषण करने-कराने हेतु प्रयत्न किया जा रहा हैे। इस हेतु सरकारों की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करवाने के भी सतत प्रयास किये जा रहे हैं ।

पर्यावरण आराधना

मानव पर्यावरण की श्रेष्ठतम कृति हैं। विफा द्वारा पर्यावरण की आराधना स्वरूप गंगा को प्रदूषित होने से व जल का अपव्यय होने से रोकने के प्रयासों में सहयोग प्रदान किया जायेगा। साथ ही यह अभियान भी चलाया जायेगा कि वन सम्पदा के विस्तार हेतु प्रति परिवार न्यूनतम् एक पेड़ लगाये तथा उसकी सुरक्षा करे ।

राष्ट्रहित बन्दना

एक महीने में कम से कम एक दिन निर्धारित तिथि व समय पर हर जाति, वर्ग, वर्ण के लागों को साथ लेकर राष्ट्र के प्रति कृतज्ञ भाव से व्यक्तिगत तथा सामूहिक रूप में देशहित को समर्पित करते हुए एक ईश वन्दना का सस्वर पाठ का आयोजन करना, विफा की कल्पना है।

संस्कृति विहार की स्थापना

भारत की बहुरंगी सनातन संस्कृति को प्रतिष्ठापित करने तथा वैश्वीकरण के दुष्प्रभावों से भावी पीढ़ी को सजग करने हेतु देश की विभिन्न दिशाओं में संस्कृति मन्दिर स्वरूप संस्कृति विहार की स्थापना की कल्पना पर विचार व क्रियान्वयन विप्र फाउण्डेशन की अभिलाषा है ।

सामाजिक समरसता

जातीय संकीर्णता का ब्राह्मण समाज में कभी भी कोई स्थान नहीं रहा है। हम सर्वदा ही विशाल उदारता के हीं पक्षधर रहे हैं। ब्राह्मणों ने ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ जैसे मंगलकारी मंत्रों से समरसता का उद्घोष किया है। विशेष प्रज्ञा से सुसम्पन्न न्याय प्रिय विप्र समाज ने सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के कल्याण को ध्यान में रखकर सत्त साधना व आध्यात्म की आराधना की है, करता रहेगा। विप्र फाउण्डेशन की कामना है कि पूरा भारतीय समाज तेजस्वी और ओजस्वी बने, ज्ञानी और विज्ञानी बने। विप्र फाउण्डेशन द्वारा सामाजिक समरसता को समर्पित कुछ प्रमुख कार्यक्रम:-

न्याय प्रतिबद्धता

न्याय प्रियता ब्राह्मण का सर्वोच्च गुण है। पीड़ित व्यक्ति के प्रति यथासम्भव सहयोग का हाथ बढ़ाना ही मानव धर्म है। किसी भी जाति-वर्ग के साथ कहीं भी अन्याय हो रहा हो तो न्याय के प्रति प्रतिबद्धता दिखाते हुए अन्याय के विरुद्ध खड़े होना विफा का दृढ़ संकल्प है।

प्रज्ञा-कौशल प्रोत्साहन

विप्र समाज द्वारा अपने दायित्वबोध का निर्वाह करते हुए शिक्षा, साहित्य, खेलकूद, अभिनय, संगीत, नृत्य एवं चित्रकला आदि विधाओं मे श्रेष्ठता को प्रोत्साहित, पुरस्कृत एवं अभिनन्दित करना, तदर्थ कार्यक्रमों का आयोजन करना प्रज्ञा-कौशल प्रोत्साहन का लक्ष्य है।

सामाजिक सरोकार

परम्पराओं के साथ युगानुकूल परिवर्तन के पक्षधर बन कर काल बाह्य रीतियों व नीतियों में बदलाव के लिये समाज में जागरूकता लाने, संस्कृति का अनुसरण करते हुए वृद्धजनों की सेवा-सुश्रुषा करने, अभिशप्तजनों की यथासम्भव मदद करने, बेटी बचाओ अभियान हेतु विफा अवधारित है ।

समरसता सम्मान

परम्पराओं के साथ युगानुकूल परिवर्तन के पक्षधर बन कर काल बाह्य रीतियों व नीतियों में बदलाव के लिये समाज में जागरूकता लाने, संस्कृति का अनुसरण करते हुए वृद्धजनों की सेवा-सुश्रुषा करने, अभिशप्तजनों की यथासम्भव मदद करने,बेटी बचाओ अभियान हेतु विफा अवधारित है।

स्वजातीय गतिशीलता

अपनी परम्परा का ज्ञान, जातीय चेतना और आत्मविश्लेषण की त्रिवेणी समाज में प्रवाहित होती रहती है तभी समाज साक्षात् तीर्थराज की भांति प्रतिष्ठित होकर मानवता को मुद्मंगलमय बनाता है । ब्राह्मणत्व जगेगा तभी राष्ट्र जगेगा। एक नई चेतना, स्फूर्ति व सकारात्मक विचारधारा से समाज जब उन्नत होगा तो राष्ट्र स्वतः ही सामर्थ्यवान बन जायेगा । समाज के सर्वांगीण विकास हेतु मुक्त एवं अकुण्ठ भाव से विप्र फाउण्डेशन योजनाबद्ध एवं समर्पण के साथ कार्यरत है। वर्तमान में विफा द्वारा स्वजातीय गतिशीलता को समर्पित कुछ प्रमुख कार्यक्रम:-